भटकाना किसके द्वारा सरकार या विपक्ष?


नागरिकता कानून के संदर्भ में विभिन्न प्रेस कॉन्फ्रेंस, टीवी व अन्यों के द्वारा राजनीतिक व नागरिक मीटिंगों, इंडिया टीवी पर जनता की अदालत, देश के प्रमुख स्तंभ लेखकों के लेख इत्यादि में बहुत ही विचित्र भटकाव प्रगट हो रहा है द्य एक तरफ सरकार व कुछ राजनीतिक पार्टियाँ इसे देश हित में आवश्यक व पिछले करीब 30 वर्षों से विचारणीय बतला रही है। वहीं विपक्ष की कुछ पार्टियाँ इसे सरकार के द्वारा आर्थिक मुहों पर से ध्यान परिवर्तन करने वाला बतलाकर, अल्पसंख्यकों के वोट बटोरने की राजनीति कर रही है घ वे इस हद तक चले गए कि उन्होंने न केवल अल्पसंख्यकों को अपितु छात्र संगठनों को भी भड़काकर हिंसक आंदोलनों के साथ सफल असफल प्रयास किए देश की खरबों रुपयों की राष्ट्रीय व निजी संपत्तियों को बर्बाद किया। कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई। हमारे संविधान के रचयिता माननीय श्रीमान डॉ. बी.आर.आंबेडकर जी ने अपनी किताब "पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन" में भारत के पुराने इतिहास का वर्णन करते हुए यह लिखा है कि मुस्लिम धर्म का उदय छठी शताब्दी में सऊदी अरब से हुआ। सन 980 में राजा जयपालजी अफगानिस्तान भारत की सीमा में राज करते थे। तब से मुसलमानों ने भारत की सीमा पर हमले करना प्रारंभ किए एवं लगातार मोहम्मद बिन कासिम, मोहम्मद गौरी, मेहमूद गजनवी, कुतूबुद्दीन, गयासुद्दीन, अलाउद्दीन खिलजी, फिरोज शाह तुगलक, तैमूर लंग, मुगल, बाबर(1526) एवं उसके पश्चात 16वीं, 17वीं, 18वीं शताब्दी से 1947 तक अंग्रेजों ने कलकत्ता से व्यापार–व्यवसाय हेतु आगमन कर एवं करीब 250 से अधिक वर्षों तक भारत पर राज्य किया। संविधान निर्माता डॉ. बी.आर.अंबेडकर ने लिखा है कि मुसलमानों ने भारत की सीमा में घुसने के साथ साथ लूटपाट कत्लेआम करते हुए लाखों-करोड़ों हिंदुओं, हिंदू सैनिकों का भी सर संविधान निर्माता डॉ. बी.आर.अबेडकर न लाख कब्जे में लेकर उनसे निकाह (चार–चार पत्नियाँ रखने का अधिकार मुस्लिम धर्म में हैं) कर अन्य स्त्रियों को मार डाला। इस प्रकार मुसलमानों ने मुस्लिम आबादी बढ़ाते हुए तलवार की  नोक पर 600 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन किया। उस जमाने में देश में करोड़ों हिंदुओं बच गए। मुसलमानों ने हिंदुओं को नीच कर्म करने के लिए मजबूर किया द्य (मैला-उठाना, झाडू लगाना, सुंदर स्त्रियों से वैश्यालय चलाये इत्यादि) उसी अवधि में संत गोगादेव ने अपने अनुयायी को मुस्लिम धर्म स्वीकार नहीं कर नीचकर्म करने को तैयार किया। इस प्रकार हिंदू धर्म की रक्षा की द्य आज भी हरिजन लोग गोगा नवमी मनाते हैं धीरे-धीरे हिन्दू, राजपूत, सिक्ख, मराठा आदि भी संगठित होकर अपनी-अपनी रियासतें बनाकर मुसलमानों के विरोध में आये। अंग्रेजों ने जब भारत के इस जातिवाद को देखा तो 'डिवाइड एंड रूल' से शासन प्रारम्भ किया, विभिन्न जातियों में आपसी वैमनस्य पैदा कर हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, छुआछूत इत्यादि से भारतवासियों को आपस में लड़ाकर राज्य करने के साथ-साथ ईसाई धर्म का प्रारम्भ हुआ। बंधुओं, मेरा मानना है कि उक्त इतिहास 1947 के बाद जन्मे आजाद भारत के कई लोगों को विदित नहीं है। पिछले 25 वर्षों से तो स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में से भी विलोपित हो रहा है। आजादी के समय भारत में 542 रियासतें थी जिसे अखण्ड भारत बनाने के लिए हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीजी, प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू, गृहमंत्री श्री सरदार वल्लभभाई पटेल आदि के संयुक्त प्रयासों से भारत में विलय हुआ___ 1947 में भारत के तीन टुकड़े पश्चिमी पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान एवं बचा हुआ भारत इन 542 रियासतों का निर्माण भारतवर्ष में हुआ द्य दोनों पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय व अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय, तथा भारत में बहुसंख्यक हिंदू समुदाय एवं अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय रह गया। तीनों देशों में जातिवाद व आपसी झगड़े को निपटाने में 1950 में भारत के माननीय प्रधानमंत्री "श्रीमान जवाहरलालजी नेहरू” एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री "लियाकत अली के बीच समझौता हुआ जिसमें निर्णय किया गया कि तीनों देशों में सभी जाति के हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपसी सौहार्द के साथ प्रेममय वातावरण में रहेंगे। यदि कोई भी देश बदलना चाहेंगे तो स्वेच्छा से बदल सकता है। संबंधित सरकारें उसे संरक्षण प्रदान करेगी। परंतु यह समझौता आगे नहीं चल पाया एवं दोनों पाकिस्तानों ने अपने आप को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर दियाभारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र ही बना रहा। भारत ने मुसलमानों को पूर्ण संरक्षण, सरकारी नौकरियाँ, शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य सभी मानवीय एवं धार्मिक सुविधाएँ प्रदान की गई। जबकि पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर हिंदू लड़कियों का अपहरण करने का सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी हैं घ जिससे वहाँ रह रहे लाखों अल्पसंख्यक अपने आप को असुरक्षित मानते हुए भारत में आने लगें। इन्हें शरणार्थी (आप्रवासी) माना गया, भारत का नागरिक नहीं। आज भारत सरकार ने बहुप्रतीक्षित तीनों देशों से आए वहाँ के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का कानून संसद में प्रस्तावित कर, प्रचंड बहुमत से बनाया। इस कानून के बनने से अवैध रूप से भारत में रह रहे मुसलमानों को नागरिकता प्राप्त नहीं होकर केवल अन्य 5 धर्मों के शरणार्थी को भारतीय नगरीक माना गया हैं। राज्यसभा में कानून को स्वीकृति प्राप्त होने के दो-तीन दिनों तक समस्त विरोधी पार्टियाँ विशेषकर वामपंथी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस ने अपने वोट बैंकों को कमजोर होता देख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कानून के विरोध में आंदोलन प्रारंभ करवा दिया। जिसने हिंसा का रूप धारण कर लिया व उन्होंने झूठा प्रचार कर आजादी से अब तक रह रहे मुसलमानों को भड़काना प्रारम्भ कर दिया कि CAA, NPR NRP के तहत उनसे उनके बुजुर्गों के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मांगें जावेंगें अन्यथा उन्हें भारत की नागरिकता से वंचित कर दिया जावेगा। सत्ता के लिए तिलमिला रहे इन विरोधियों राजनायकों ने देश के अल्पसंख्यकों को भाजपा के विरुद्ध भड़काया। वर्तमान में भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में पिछले 2 साल से चल रही आर्थिक मंदी का दोष मोदी सरकार पर लगाकर अल्पसंख्यकों एवं युवाओं में असंतोष फैला दिया। नित्य प्रति यह विरोधी, राजनीतिक पार्टियाँ मोदी सरकार के विरोध में सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रचार कर देशवासियों को जो जातिवाद का चोंगा पहना रहीं हैं यह देश के लिए अत्यंत ही हानिकारक है